महाराष्ट्र-गुजरात में तबाही: विदर्भ में 19 की मौत, जूनागढ़ में 3000 लोग फंसे, पंजाब में घरों में घुसा पानी

Uttarakhand Press 24 July 2023: महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र पिछले कई दिनों से भारी बारिश का कहर झेल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि रविवार सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों के दौरान अकोला में 107.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश से विदर्भ का अमरावती डिवीजन ज्यादा प्रभावित है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि राज्य भारी बारिश से उपजे हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भारी बारिश की वजह से पिछले 10 दिनों में 19 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। वहीं, 4,500 से ज्यादा घर ध्वस्त हो गए हैं और 54,000 हेक्टेयर फसल को भी नुकसान पहुंचा है। उधर, गुजरात भी बाढ़ से बेहाल है। जूनागढ़ में रविवार सुबह 241 मिलीमीटर बारिश के बाद हर तरफ सैलाब की स्थिति है। 3000 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। उधर, अहमदाबाद स्थित सरदार बल्लभभाई एयरपोर्ट पर रनवे से लेकर पार्किंग तक हर तरफ पानी ही भरा नजर आया।

विदर्भ क्षेत्र में पानी ही पानी:
महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र पिछले कई दिनों से भारी बारिश का कहर झेल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि रविवार सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों के दौरान अकोला में 107.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश से विदर्भ का अमरावती डिवीजन ज्यादा प्रभावित है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि राज्य भारी बारिश से उपजे हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अधिकारियों ने बताया कि बारिश से जुड़ी घटनाओं के कारण 13 जुलाई के बाद से गढ़चिरौली और भंडारा जिलों में तीन-तीन मौतें हुई हैं, वर्धा और गोंदिया में दो-दो और चंद्रपुर में एक व्यक्ति की जान गई है। वहीं यवतमाल में तीन लोगों और अकोला और बुलढाणा में एक-एक व्यक्ति ने जान गंवाई है। राज्य के राहत एवं पुनर्वास मंत्री अनिल पाटिल ने रविवार को यवतमाल का दौरा कर हालात की समीक्षा की।

रायगढ़ : बचाव अभियान बंद, 57 अब भी लापता:
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने महाराष्ट्र में रायगढ़ जिले के इरशालवाडी में बुधवार को हुए भूस्खलन के सिलसिले में खोज एवं बचाव अभियान बंद कर दिया है। महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जो लोग लापता हैं, उनके परिजन भी मानते हैं कि वे मलबे में दफन हो गए हैं और उन्हें बचाव अभियान बंद करने पर कोई एतराज नहीं है। मंत्री ने कहा कि भूस्खलन स्थल पर धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगाई गई है। सामंत ने कहा कि एनडीआरएफ कर्मियों समेत 1100 से अधिक लोग बचाव एवं राहत कार्य में लगे थे जो चार दिन तक चला।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भूस्खलन:
रायगढ़ जिले के अदोशी गांव के पास मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर रविवार रात भूस्खलन हुआ। इस कारण मुंबई की ओर जाने वाला यातायात रुक गया। एक पुलिस अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूस्खलन रात करीब साढ़े दस बजे हुआ, जिसमें कोई घायल नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि भूस्खलन से मुंबई की ओर जाने वाले एक्सप्रेसवे की तीन लेन बुरी तरह प्रभावित हुईं है। मार्ग को साफ करने के लिए एक जेसीबी मशीन, लगभग 25 डंपरों को लगाया गया है और पुलिस के साथ-साथ अन्य एजेंसियों के कर्मी भी मौके पर मौजूद हैं।

पंजाब : घग्गर का पानी गांवों में घुसा, आनंदपुर साहिब के पास तटबंध टूटा:
तेज बारिश के कारण घग्गर और सतलुज उफान पर हैं। घग्गर का पानी पटियाला के गांवों घुसने से काफी नुकसान हुआ है। भागपुर और दड़वा के आस-पास के गांवों में फसलें डूब गई हैं। वहीं, आनंदपुर साहिब के गांव हरीवाल में सतलुज पर बनाया गया धुस्सी बांध टूटने से खेतों में पानी भर गया है।

जम्मू-कश्मीर: रामबन में भूस्खलन, कुपवाड़ा में बादल फटा:
रामबन जिले से 26 किमी दूर धर्मकुंड के हारूग इलाके में भू्स्खलन की चपेट में आकर दो वाहन दब गए। हालांकि, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ने तत्काल दोनों वाहन चालकों को निकाल लिया। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में बादल फटने से जिरहामा, लोलाब, शतपोरा, बटपोरा, चलगुंड में घरों-दुकानों में पानी घुस गया।

हिमाचल: बारिश थमी, पर हालात बदतर:
हिमाचल में बारिश थमने के बावजूद रविवार को 696 सड़कें, 1052 ट्रांसफार्मर और 370 पेयजल स्कीमें ठप पड़ी रही।वहीं, उत्तराखंड में भारी बारिश और अरकोट मार्केट के निकट भूस्खलन के कारण अरकोट-हिमाचल रोड समेत दर्जनों सड़कें अवरुद्ध हैं।

ऊर्जा खपत बढ़कर 408 अरब यूनिट:
बिना मौसम बारिश और बिपरजॉय चक्रवात के कारण देश में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान ऊर्जा खपत 1.8 फीसदी बढ़कर 408 अरब यूनिट पहुंच गई। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) के मुताबिक, 2022 की समान तिमाही में देश में ऊर्जा खपत 400.44 अरब यूनिट रही थी।

सबसे ज्यादा खपत 223.23 गीगावॉट:
जून तिमाही में सबसे ज्यादा खपत 223.23 गीगावॉट रही। यह 2022 की समान अवधि में 215.5 व 2021 में 194 गीगावॉट रही थी। ऊर्जा मंत्रालय का अनुमान था कि गर्मी में मांग 229 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। लेकिन, बिपरजॉय और बेमौसम भारी बारिश की वजह से यह अनुमान सही साबित नहीं हो पाया।

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