जोशीमठ: अब आदि गुरु शंकराचार्य ज्योतिर्मठ पर दरारें,  2500 साल पुराना कल्प वृक्ष-मंदिर खतरे की जद में

Uttarakhand Press News, 9 January 2023: जोशीमठ: जोशीमठ में लगातार हो रहे भू धंसाव (joshimath subsidence) की आंच अब ज्योतिर्मठ तक पहुंच चुकी हैं. कहा जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने आज से करीब करीब 2500 वर्ष पूर्व जिस शहतूत के वृक्ष (इस स्थानीय लोग अब कल्प वृक्ष कहते हैे) के नीचे गुफा के अंदर बैठकर ज्ञान की प्राप्ति की थी, आज उस कल्प वृक्ष का अस्तित्व मिटने की कगार पर है. मंदिर के नीचे बने प्राचीन ज्योतिरेश्वर मंदिर पर भी भू धंसाव (subsidence in Joshimath Jyotirmath) के चलते बड़ी बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं. कभी भी यह ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत ढह सकती है.

आदि गुरु शंकराचार्य ने पहला मठ यहीं स्थापित किया: पूरे देश में हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार करने और रूढ़ियों को तोड़ने के लिए जाने जाने वाले आदि गुरु शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की थी. ये चारों मठ आज भी चार शंकराचार्यों के नेतृत्व में सनातन परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं. वहीं हिंदू धर्म में मठों की परंपरा लाने का श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य (Adi Guru Shankaracharya) को जाता है, जो आज भी आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उत्तरामण्य मठ या उत्तर मठ, ज्योतिर्मठ जो कि जोशीमठ में स्थित है. वहीं पूर्वामण्य मठ या पूर्वी मठ, गोवर्धन मठ जो कि पुरी में स्थित है. जबकि दक्षिणामण्य मठ या दक्षिणी मठ, शृंगेरी शारदा पीठ जो कि शृंगेरी में स्थित है.

शंकराचार्य की तप स्थली पर संकट: पश्चिमामण्य मठ या पश्चिमी मठ, द्वारिका पीठ जो कि द्वारिका में स्थित है. आदि गुरु शंकराचार्य का जन्म नाम शंकर था. उनका जन्म 788 ई– मृत्यु 820 ई मानी जाती है. वो अद्वैत वेदांत के प्रणेता, संस्कृत के विद्वान, उपनिषद व्याख्याता और हिंदू धर्म प्रचारक थे. मान्यता के अनुसार आदि शंकराचार्य को भगवान शंकर का अवतार माना जाता है. इन्होंने अपने जीवन का अधिकांश भाग उत्तर भारत में बिताया था. आज इस मठ पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और ऐतिहासिक कल्प वृक्ष का अस्तित्व मिटने की कगार पर है.

ज्योतिर्मठ के नाम पर हुआ जोशीमठ: अनुमान है कि 815 ई. में यहीं पर आदि गुरु शंकराचार्य ने एक शहतूत के पेड़ के नीचे साधना कर ज्ञान प्राप्ति की थी. इसीलिए इस जगह का नाम ज्योतिर्मठ पड़ा जो बाद में धीरे-धीरे आम बोलचाल की भाषा में जोशीमठ हो गया. बदरीनाथ धाम और भारत के तीन छोरों पर मठों की स्थापना करने से पहले शंकराचार्य ने जोशीमठ में ही पहला मठ स्थापित किया था. यहीं पर शंकराचार्य ने सनातन धर्म के महत्वपूर्ण धर्मग्रन्थ शंकर भाष्य की रचना भी की थी.

यहां आज भी 36 मीटर की गोलाई वाला 2500 साल पुराना वह शहतूत का पेड़ है, जिसके नीचे शंकराचार्य ने साधना की थी. इसी पेड़ के पास शंकराचार्य की वह गुफा भी मौजूद है जहां उन्होंने तप किया था. इस गुफा को ज्योतिरेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. जोशीमठ में विष्णु भगवान को समर्पित एक लोकप्रिय मंदिर है. इसके अतिरिक्त नरसिंह, वासुदेव, नवदुर्गा आदि के मंदिर भी यहां पर मौजूद हैं. मान्यता है कि जोशीमठ के नरसिंह मंदिर की पूजा-अर्चना किये बगैर बदरीनाथ की यात्रा अधूरी ही रह जाती है. इस मंदिर में भगवन नरसिंह की काले पत्थर से बनी मूर्ति भी है.

जोशीमठ शहर में भू-धंसाव (Landslide in Joshimath city) और घरों में पड़ रही दरारों से लोगों के जीवन और संपत्ति को लगातार नुकसान पहुंच रहा है. वहीं बीते दिनों ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर (Avimukteshwaranand Saraswati filed petition in SC) की है. याचिका में जोशीमठ में भूमि धंसाव की घटना को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रभावित परिवारों को राज्य सरकार द्वारा त्वरित राहत देने और पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की गई है.

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