मच्छर भगाने की क्वाइल जलाकर सोए छह लोगों की दम घुटने से मौत, आग से ज्यादा खतरनाक है धुआं

Uttarakhand Press News, 01 April 2023: पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में घर में मच्छर भगाने की क्वाइल जलाकर सोए छह लोगों की दम घुटने से मौत के बाद इलाके में दहशत है। छोटे-छोटे कमरों में भरे दमघोंटू धुएं और अंधेरे के कारण लोग फंस गए। जैसे-तैसे कुछ लोग बाहर निकल आए, लेकिन छह लोग जान नहीं बचा पाए। हसमत और नाजमीन भी अपने चार में से तीन बच्चों को ही निकाल पाए। जब ढाई साल के बेटे हमजा की मौत की जानकारी नाजमीन को मिली तो वह बेसुध हो गई। वह बस एक ही बात बार-बार बोल रही थी कि ‘हाय मेरा हमजा।’

पड़ोस की महिलाएं उसे किसी तरह संभालने को कोशिश कर रही थीं। महिलाएं उसे धूप से हटकर छांव में बैठने के लिए कहती रहीं, लेकिन नाजमीन दीवार की टेक लिए बेसुध पड़ी रही। बच्चे कभी उससे लिपटते तो कभी लोगों को देखतेे। पहली मंजिल पर परिवार ने सुबह चार बजे उठकर एक साथ सहरी की थी और सो गए थे। करीब 8 बजे भूतल से चीख सुनकर जागे तो कमरा धुएं से भरा था। बिजली भी गुल थी। अंधेरे और धुएं के कारण कमरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। नाजमीन और पति हसमत जान बचाकर तीन बच्चों को किसी तरह घर से बाहर निकाल लाए।

आग इतनी भयावह थी कि घर के खिड़की, दरवाजों से धुएं का गुबार निकल रहा था। हसमत बेटे हमजा को बचाने केे लिए दोबारा घर में जाना चाहते थे, लेकिन लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। हसमत चिल्लाते रहे कि हमजा नहीं मिला, वो अंदर जा रहे हैं। लोगों ने किसी तरह उन्हें काबू किया और समझाया कि यदि अंदर गए तो जिंदा वापस नहीं लौटोगे।

हसमत बेटी माहिरा (6), बेटे फरहान (4), बेेटी सोनी (15) और पत्नी को चादर में लपेटकर सीढ़ियों से किसी तरह नीचे आए। इस बीच उनके हाथ, सर के बाल और चेहरा झुलस गया। उनका साथ देने में सोनी भी लपटों की चपेट में आ गई। सोनी और हसमत को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

ड्यूटी जाने के लिए जाग रहे थे इसलिए बच गए:
मुतिउर रहमान ड्यूटी पर जाने के लिए सुबह जग गए थे, इसलिए बच गए, लेकिन उनके साथ कमरे में सो रहे जहीदुल और फजलू चौधरी नहीं बच पाए। तीनों तीसरी मंजिल पर एक साल से कमरा किराए पर लेकर रह रहे थे। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊपरी मंजिल पर दर्जनभर लोग एक ही कमरे में रहते थे। अधिकतर लोग सुबह काम पर चले गए थे। रहमान पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन से आकर यहां बैटरी रिक्शा चलाते हैं। उनके साथी भी कोई बैटरी रिक्शा तो कोई पैर से चलाने वाला रिक्शा चलाकर गुजारा करते हैं। रहमान ने बताया कि जब आग लगी तो सभी गहरी नींद में सो रहे थे। उनका ड्यूटी पर जाने का समय हो गया था, इसलिए वो अचानक जग गए। कमरे में धुंआ भर गया है, कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था और दम घुट रहा था। चिल्लाकर बाकी साथियों को जगाया। उनके पीछे ताजूदास बचकर भागे, लेकिन जहीदुल और फजलू नहीं निकल पाए। आग बुझने के बाद पुलिस ने उनका शव अंदर से निकाला।

आग से ज्यादा खतरनाक है धुआं:
आग से ज्यादा खतरनाक धुआं है, ये सीधे लंग्स तक पहुंच जाता है जो शरीर में ऑक्सीजन की कमी कर देता है। इससे व्यक्ति बेहोश व कमजोर हो जाता है। धुएं के साथ कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर में पहुंचकर सोचने-समझने की शक्ति को खत्म कर देती है। ब्रेन प्रभावित होने से शरीर भी बचाव के लिए कुछ नहीं कर पाता। यह ऐसी गैस है जो मनुष्यों और जानवरों के लिए विषाक्त है। अगर कार्बन मोनोऑक्साइड सांस के साथ शरीर में चली गए तो शरीर पीला पड़ जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति की कुछ देर में मौत भी हो सकती है। इसके अलावा चक्कर आने के साथ कमजोरी महसूस होने लगती है। कोमा की अवस्था में श्वसन अंगों के फेल हो जाने से मौत हो जाती है।

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